भगवान का गजानन स्वरूप

भगवान गणेश गजानन क्यों है? इस संबंध में यह कथा प्रचलित है कि जब माता पार्वती स्नान कर रही थीं तो उन्होंने द्वार के बाहर भगवान गणेश को पहरा देने के लिए बैठा रखा था कि वह किसी को भीतर न आने दें। इसी बीच भगवान शिव भीतर जाने लगे तो बालक गणेश ने उन्हे भीतर जाने से रोक दिया। इस बात पर शिव ने क्रोधित होकर उसका सिर काट दिया। बाद में जब उन्हे अपने इस कार्य के लिए पश्चाताप हुआ तो उन्होंने हाथी का सिर लगा कर उन्हे गजानन स्वरूप दिया।

इसी प्रकार गणपति का एक दांत टूटने के संबंध में ब्रह्मवैवर्त पुराण में कथा मिलती है। एक बार परशुराम शिव के दर्शन के लिए कैलास गए। वहां श्रीगणेश द्वार की रक्षा कर रहे थे। परशुराम भीतर जाना चाहते थे पर गणेश ने उनको रोका। इस संघर्ष में परशुराम ने शिव का दिया हुआ परशु नामक अस्त्र उन पर चलाया। गणेश पिता द्वारा दिए गए अस्त्र का अपमान नहीं करना चाहते थे। अत: उस परशु को उन्होंने अपने एक दांत पर ले लिया, जिससे उनका एक दांत टूट गया।

महाभारत में इस बात का संदर्भ मिलता है कि महाभारत के रचयिता वेद व्यास द्वारा बोले गए शब्दों को लिपिबद्ध करके उसे ग्रंथ का रूप देने का काम श्रीगणेश ने ही किया था।

गणेश का जन्मोत्सव

स्कंद पुराण के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवानं गणेश का अवतार हुआ था। इसीलिए इस दिन हर्षोल्लास के साथ गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है और दस दिनों के बाद अनंत चतुदर्शी के दिन धूमधाम के साथ गणपति का विसर्जन किया जाता है। दीपावली के अवसर पर भारत एवं कई अन्य देशों में हिंदू-धर्मावलंबी परिवारों में महालक्ष्मी जी और भगवान श्रीगणेश का पूजन होता है। महालक्ष्मी धन की देवी है। श्रीगणेश सभी विघ्नों के नाशक और सुंबुद्धि प्रदान करने वाले है। इसीलिए देवी लक्ष्मी के साथ हमेशा गणेश की भी पूजा की जाती है।

गणेश केवल भारत ही नहीं बल्कि जावा, बर्मा , चीन, जापान, तिब्बत, श्रीलंका, थाइलैंड आदि देशों में भी विभिन्न नामों से पूजनीय है।

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