प्रथम पूजनीय श्रीगणेश

गणेश जी ऐसे देवता है, जिनकी पूजा-अर्चना हिंदू परिवारों के प्रत्येक धार्मिक आयोजनों में सबसे पहले की जाती है। गणेश जी की उत्पति और इनके प्रथम पूज्य होने के संबंध में विभिन्न पुराणों में अलग-अलग कथाएं मिलती हैं। हालांकि इनमें से कुछ ऐसी हैं, जिनमें विशेष संदर्भो में समानता है। गोस्वामी तुलसीदास जी श्रीरामचरितमानस की रचना के प्रथम मंगल श्लोक में उनका स्मरण करते हुए कहते है- अक्षरों, अर्थ समूहों, रसों, छंदों और मंगलों की रचना करने वाली सरस्वती और गणेश जी की मैं वंदना करता हूं।

प्रचलित कथा

श्रीगणेश की पूजा सबसे पहले क्यों की जाती है, इस संबंध में बहुत रोचक कथा प्रचलित है। एक बार भगवान शिव के समक्ष गणेश और कार्तिकेय दोनों भाइयों के बीच इस बात को लेकर विवाद हो गया कि दोनों में बड़ा कौन है। यह सुनकर भगवान शिव ने कहा किजो अपने वाहन के साथ सबसे पहले समस्त ब्रह्मांड की परिक्रमा करके मेरे पास लौट आएगा वही बड़ा माना जाएगा। यह सुनते ही भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार ब्रह्मांड की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। लेकिन भगवान गणेश ने अपने वाहन चूहे पर बैठ कर माता-पिता की परिक्रमा की और सबसे पहले उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि मेरी परिक्रमा पूरी हो गई क्योंकि मेरा संसार मेरे माता-पिता में ही निहित है। बालक गणेश का यह बुद्धिमत्तापूर्ण उत्तर सुनकर भगवान शिव इतने प्रसन्न हुए कि उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया।

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