जब गणेश जी ने दिया था अपने माँ व् पिता को अपनी समझदारी का प्रमाण

गणेश जी ने अपनी बाल लीलाओं में हमेशा समझदारी की बातें की हैं. आज हम आपको गणेश जी की समझदारी की कहानी सुनाते हैं जो आप अपने बच्चे को सुनाएंगे तो फिर से आपके बच्चे आपके लिए आज्ञाकारी बन जाएंगे.

एक दिन की बात है जब शिव जी के बड़े पुत्र कार्तिकेय जी ने शिव जी से कहा कि ‘मैं सबसे ज्यादा ज्ञानी हूं’ पर इतने में ही अचानक गणेश जी चले आते हैं जिन्हें देख शिव जी मुस्कुराने लगते हैं और कहते हैं कि कार्तिकेय और गणेश को एक परीक्षा देनी होगी. कार्तिकेय और गणेश हैरान हो जाते हैं कि ‘परीक्षा हां पिता जी जैसा आप कहें…..

शिव जी फिर से मुस्कुराने लगते हैं और कहते हैं कि तुम दोनों में सबसे ज्यादा ज्ञानी कौन है यही पता लगाने के लिए यह परीक्षा ली जा रही है. शिव जी कार्तिकेय और गणेश से कहते हैं कि तुम दोनों में से जो भी पूरे ब्रह्मांड के सात चक्कर लगाकर आएगा और वो भी सबसे कम समय में वो सबसे ज्यादा ज्ञानी माना जाएगा.

फिर क्या था कार्तिकेय जी जल्दी से बिना सोच-विचार किए पूरे ब्रह्मांड के सात चक्कर लगाने के लिए निकल पड़ते हैं पर गणेश जी पहले शिव जी की तरफ देखते हैं और फिर माता पार्वती जी की तरफ देखते हैं. फिर गणेश जी शिव जी और माता पार्वती को प्रणाम कर दोनों के साथ चक्कर लगाना शुरू कर देते हैं.

शिव जी गणेश जी से कहते हैं कि गणेश यह तुमने क्या किया है हमने तुम्हें ब्रह्मांड के सात चक्कर लगाने के लिए कहा था और तुम हमारे ही सात चक्कर लगा रहे हो. गणेश जी कहते हैं कि ‘मेरे लिए मेरा पूरा ब्रह्मांड आप दोनों ही हैं फिर आप ही तो कहते हैं पिता जी कि “माता-पिता के चरणों में पूरा ब्रह्मांड होता है.

देखा आपने गणेश जी बचपन से ही कितने समझदार थे. इसीलिए तो शिव जी ने गणेश जी को वरदान दिया था कि संसार में कहीं भी कोई भी शुभ कार्य होगा तो सबसे पहले गणेश जी की आरती की जाएगी.
 

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